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पूस की रात – ठंड और भूख से लड़ते किसान की व्यथा
मुख्य पात्र: हल्कू (किसान), मुन्नी (पत्नी), जबरा (पालतू कुत्ता) स्थान: खेत, गाँव विषय: गरीबी, किसान का संघर्ष, सामाजिक विषमता 🌾 कहानी की शुरुआत: हल्कू एक गरीब किसान है जिसने बड़ी मुश्किल से तीन रुपये जमा किए हैं ताकि ठंडी रातों के लिए एक कम्बल खरीद सके। लेकिन उसी समय साहूकार सहना पैसे माँगने आ जाता…
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हर लफ़्ज़ में एक जज़्बात छुपा है…
