वो लकड़ी की अलमारी आज भी वैसी ही है थोड़ी सी जंग लगी, थोड़ी सी यादों से भरी। जब माँ ने उसे खोला, तो एक पुरानी डायरी नीचे गिर पड़ी। पीले पन्नों में एक चिट्ठी दबी थी मेरी लिखी हुई, शायद दस साल पहले। “प्यारे पापा, आप जब स्टेशन पर मुझे छोड़कर गए थे, मैंने…