• नाम नहीं था उस रिश्ते का

    वो रोज़ आती थी उसी वक़्त, उसी मोड़ पर। मैं भी वहीं होता था बस यूँ ही, बिना वजह। ना उसने कभी कुछ कहा, ना मैंने कभी कुछ पूछा। बस एक खामोशी थी जो हर दिन थोड़ी और गहरी होती जाती थी। कभी-कभी उसकी आँखें कुछ कहती थीं, जैसे कोई अधूरी बात… जो लफ़्ज़ों में…

  • माँ की वो चुप्पी

    घर में सब कुछ वैसा ही था दीवारें, तस्वीरें, और वो पुराना रेडियो। बस माँ की आवाज़ नहीं थी। रसोई में हल्की सी हलचल थी, लेकिन उसमें वो अपनापन नहीं था। वो जो हर सुबह चाय के साथ मिल जाता था एक नज़र, एक सवाल, एक शिकायत। अब कुछ नहीं था। सिर्फ एक पुराना स्टील…

  • बचपन की वो आख़िरी चिट्ठी

    वो लकड़ी की अलमारी आज भी वैसी ही है थोड़ी सी जंग लगी, थोड़ी सी यादों से भरी। जब माँ ने उसे खोला, तो एक पुरानी डायरी नीचे गिर पड़ी। पीले पन्नों में एक चिट्ठी दबी थी मेरी लिखी हुई, शायद दस साल पहले। “प्यारे पापा, आप जब स्टेशन पर मुझे छोड़कर गए थे, मैंने…

  • आपका स्वागत है — KitaabGhar07 में

    नमस्ते दोस्तों, मैं Ankur, और ये है मेरा छोटा सा जज़्बाती कोना – KitaabGhar07.com। यहाँ मैं वो कहानियाँ लिखता हूँ जो दिल में रहती हैं, पर अक्सर कह नहीं पाते। कुछ अपने अनुभव, कुछ कल्पनाएँ लेकिन हर एक पोस्ट में एक एहसास छुपा होता है। अगर आपको भी कभी कोई बात अंदर ही अंदर कचोटती…