घर में सब कुछ वैसा ही था दीवारें, तस्वीरें, और वो पुराना रेडियो। बस माँ की आवाज़ नहीं थी। रसोई में हल्की सी हलचल थी, लेकिन उसमें वो अपनापन नहीं था। वो जो हर सुबह चाय के साथ मिल जाता था एक नज़र, एक सवाल, एक शिकायत। अब कुछ नहीं था। सिर्फ एक पुराना स्टील…