पारिवारिक यादें

  • माँ की वो चुप्पी

    घर में सब कुछ वैसा ही था दीवारें, तस्वीरें, और वो पुराना रेडियो। बस माँ की आवाज़ नहीं थी। रसोई में हल्की सी हलचल थी, लेकिन उसमें वो अपनापन नहीं था। वो जो हर सुबह चाय के साथ मिल जाता था एक नज़र, एक सवाल, एक शिकायत। अब कुछ नहीं था। सिर्फ एक पुराना स्टील…

  • बचपन की वो आख़िरी चिट्ठी

    वो लकड़ी की अलमारी आज भी वैसी ही है थोड़ी सी जंग लगी, थोड़ी सी यादों से भरी। जब माँ ने उसे खोला, तो एक पुरानी डायरी नीचे गिर पड़ी। पीले पन्नों में एक चिट्ठी दबी थी मेरी लिखी हुई, शायद दस साल पहले। “प्यारे पापा, आप जब स्टेशन पर मुझे छोड़कर गए थे, मैंने…