स्टेशन वही था भीड़ वही, आवाज़ें वही। बस एक चेहरा नहीं था… जो हर बार मुझे छोड़ने आता था। मैंने टिकट लिया, बेंच पर बैठा, और सामने देखा वो कोना जहाँ वो हमेशा खड़ा होता था, हाथ हिलाता था, मुस्कुराता था… और कहता था, “जल्दी लौट आना।” इस बार कोई नहीं था। सिर्फ एक पुरानी…